(शाने गौ़से आज़म रहमतुल्लाह अ़लैहि14)
500 यहूदियो और इ़साइयो का क़बूले इस्लाम
ह़ज़रते शैख़ मुही़युद्दीन अ़ब्दुल क़ादिर जिलानी रह़मतुल्लाही अ़लैहि फ़रमाते है मेरे हाथ पर 500 से ज़्यादा यहूदियो और इ़साइयो ने इस्लाम क़बूल किया और एक लाख से ज़्यादा डाकू, चोर, फुस्साक़ो फुज्जार, फ़सादी और बिदअ़ती लोगो ने तौबाह की।सरकारे ग़ौसे आ'ज़म की करामत/निगाहे ग़ौसे आज़म से चोर कुत्ब बन गया
ग़ौसे आ'ज़म रह़मतुल्लाही अ़लैहि मदिनए मुनव्वरह से हा़ज़िरी देकर नंगे पांउ बगदाद शरीफ की तरफ आ रहे थे की रास्ते में एक चोर खड़ा किसी मुसाफिर का इंतज़ार कर रहा था की उसको लूंट ले/ आप जब उसके क़रीब पहुँचें तो पूछा तुम कौन हो ?उसने जवाब दिया देहाती हुं। मगर आप के कश्फ़ के ज़रिए़ उसकी मासियत और बद किर्दारी को लिखा हुवा देख लिया और उस चोर के दिल में ख़याल आया _शायद ये ग़ौसे आ'ज़म रह़मतुल्लाही अ़लैहि है।_ आप को उसके दिल में पैदा होने वाले ख़याल का इ़ल्म हो गया तो आप ने फ़रमाया : में अ़ब्दुल क़ादिर हुँ।तो वो चोर सुनते ही फौरन आप के मुबारक क़दमों पर गिर पड़ा और उस की ज़बान पर "ऐ मेरे सरदार अ़ब्दुल क़ादिर मेरे हा़ल पर रह़म फरमाये" जारी हो गया। आप को उस की हा़लत पर रह़म आ गया और उसकी इस्लाह़ के लिये बारगाहे इलाही में मुतवज्जेह हुवे तो गैब से निदा आई :ऐ ग़ौसे आज़म! इस चोर को सीधा रास्ता दिखा दो और हिदायत की तरफ रहनुमाई फ़रमाते हुवे इसे कुत्ब बना दो। चुनान्चे आप की निगाहे फैज़ रसा से वो कुत्बीय्यत के दरजे पर फाइज़् हो गया।(सीरते गौसुस्स-क़लैन् सफा 130/ ग़ौसे पाक के हा़लात,सफा 39.40)
मुहम्मद अनस रज़ा रज़वी
बड़ा रहुवा बायसी पूर्णिया (बिहार)