बालिगा लड़कियों को मस्जिद में पढ़ाना कैसा है ?
सवाल: क्या फरमाते हैं उलमा ए किराम मसला जे़ल में की ज़ैद एक मस्जिद का इमाम है वह मस्जिद में बच्चों को पढ़ाता है जिसमें लड़कियां भी पढ़ती है ज़ैद को एक लड़की से प्यार हो गया है और वह लड़की भी ज़ैद से प्यार करती है ज़ैद कभी उसको कीस करता है कभी हाथ पकड़ता है कभी गिफ्ट ला कर देता और भी बहुत कुछ ज़ैद की इस हरकत के बारे में काफी लोग जानते हैं उसने ही बताया था अब अर्ज़ यह है वह मस्जिद में नमाज़ पढ़ाता है कुछ लोग उसके पीछे नमाज़ नहीं पढ़ते इसी वजह से कहते हैं नमाज़ नहीं होगी ? क्या यह बात सही है कि ज़ैद के पीछे नमाज़ नहीं होगी और ज़ैद पर क्या हुक्म होगा ? और जो नमाज़ पढ़ी गई उनका क्या हुक्म होगा और ज़ैद की इमामत दुरुस्त है या नहीं जवाब इनायत फरमांए नवाज़िश होगी
साईल: फरमान रज़ा सैफी (मुरादाबाद)
जवाब: औव्वल बात की मस्जिद में दीनी तालीम देना चंद शराईत के साथ जायज़ है वरना नाजायज़ और वाक़ई ज़ैद मज़कुरा लड़की से प्यार करता है और उसको कीस करता है कभी हाथ पकड़ता है तो ज़ैद ज़रूर गुनाहगार व फासिक़ है कि किसी ना मोहरम औरत (लड़की) को छूना बोसा व किनार करना इंदश्शरअ हराम है उस पर तौबा करना फर्ज़ है और अगर वह अपने इस अफआल ए क़बिहा व शनईया से सिद्क़ दिल से तौबा नहीं करेगा तो आज़ाब ए आखिरत में गिरफ्तार होगा
सूरते मसउला में जिन उमूर को ज़ैद ने मज़कुरा लड़की की तरफ मंसूब किया है अगर वह शरअन साबित हो जाए तो ज़ैद क़ाबिल ए इमामत नहीं, और जितनी नमाज़ें ज़ैद ने ऐसी हरकत करने के बाद पढ़ाई है उसको दोहराना वाजिब है और उसको इमाम बनाना गुनाह है उस पर फर्ज़ है कि एलानिया तौबा करे(फतावा फैज़ूर रसूल जिल्द २ सफा ६०६)
बालिग़ा लड़कियों को किसी ना मोहरम मर्द से तालीम हासिल करना नाजायज़ है हां अगर खास पर्दा का एहतमाम है एक दूसरे की शक्ल नहीं देख सकते हैं तो कुछ उलमा ने जायज़ करार दिया है,
इसलिए ज़ैद का बालिगा लड़कियों को बेपर्दा पढ़ाना नाजायज़ व हराम है, उसको गिफ्ट देना उससे प्यार मोहब्बत का इज़हार यह सब नाजायज़ व हराम है
इन सब से सिद्क़ दिल से तौबा करे और ज़ैद को फौरन मस्जिद में पढ़ाने से रोकें उससे मस्जिद के बेहुरमती है मस्जिद का एहतराम लाज़िम व ज़रूरी है
والله اعلم بالصواب
अज़ क़लम
हज़रत मुफ्ती मोहम्मद रज़ा अमजदी
हिंदी ट्रांसलेट
मोहम्मद रिज़वानुल क़ादरी सेमरबारी (दुदही कुशीनगर उत्तर प्रदेश)