बालों में क्लिप लगाकर नमाज़ अदा करना इंदश्शरअ कैसा है?
सवाल: उलमा ए किराम की बारगाह में एक सवाल अर्ज़ है कि क्या बाल में लोहे का क्लिप लगा कर नमाज़ पढ़ सकते हैं ? जवाब इनायत फरमाएं नवाज़िश होगी?
साईल अब्दुल अज़ीज़ रज़ा
जवाब: सोने चांदी के अलावा दूसरे धातों के जे़वरात मसलन, लोहा, तांबा, पीतल, रांगा, जस्ता, वगैराह औरतों के लिए भी नाजायज़ व हराम है, दुर्रे मुख्तार में है कि ("ولا یتختم الا بالفضۃ لحصول الاستغناء بہا فیحرم بغیرھا کحجر وذہب وحدید وصفر ورصاص وزجاج وغیرھا، اھ, مخلصا") (दुर्रे मुख्तार जिल्द नहुम सफा ५१७)
और क्लिप जिसको औरतें अपने बालों में लगाती हैं उसका इस्तेमाल जायज़ है कि क्लिप खालिस ज़ेवर नहीं, उसको सिर्फ ज़ीनत के लिए ही नहीं लगाया जाता, बल्कि उसका मक़सद बालों को एक्जा करना और एक्जा रखना है, फिर उसे बालों में लगाना लबस यानी पहन्ना नहीं है और लबस ही मम्नुअ है
फतावा अमजदिया में है की सोने चांदी के बटन इस वजह से जायज़ है कि यह मलबूस नहीं हैं, बल्कि तवाबेअ लिबास से हैं
लिहाज़ा दूसरी धात के बटन भी इसी इल्लते मुशतरका से जायज़ हैं कि दूसरी धातों का पहन्ना मना है, बल्कि उनका हुक्म सोने चांदी से अख्फ है सोने चांदी का इस्तेमाल सिर्फ एक मखसूस सूरत के अलावा मुतलाक़न नाजायज़ है, और दूसरी धातें सिवाए पहनने के हर तरह इस्तेमाल कर सकते हैं, उनके बर्तनों में खा पी सकते हैं सुरमेदानी, सलाई, तेल वगैराह की प्यालीयां, क़लम दवात वगैराह तमाम अशिया को इस्तेमाल कर सकते हैं (फतावा अमजदिया जिल्द चहारूम सफा २३३)
लिहाज़ा मज़कुरा हवाला जात से ज़ाहिर हो गया कि औरतों का बालों में क्लिप लगा कर नमाज़ अदा करने में कोई हर्ज नहीं! कि यह लुब्स नहीं, और अगर मुज़कुरा सवाल मर्दों के लिए है तो जायज़ नहीं की यह औरतों का पहनावा है, मर्दों का नहीं, और औरतों की मुशाबिहत करने की मूमानिअत भी हदीस शरीफ में मौजूद है जैसा की हदीसे मुबारका में मौजूद है कि हज़रत इब्ने अब्बास रज़ि अल्लाहू तआला अन्हुमां ने कहा कि नबीए करीम सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने उन मर्दों पर लआनत फरमाई जो औरतों से मुशाबिहत करते हैं, और उन औरतों पर लआनत फरमाई जो मर्दों से मुशाबिहत करते हैं
والله و رسولہ اعلم باالصواب
अज़ क़लम
मोहम्मद इमरान रज़ा सागर
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